O कन्हैया बेबफा तूने कदर जनी नहीं
वो बृक्छ किस काम का जिसमें तनिक छाया नहीं
बिक्छ तो के जाएगा लकड़ी पड़ी रह जाएगी
O कन्हैया बेबफा तूने कदर जनी नहीं
वो नदी किस काम की जिसमें तनिक पानी नहीं
पानी तो बेह जाएगा बालू पड़ी रह जाएगी
O कन्हैया बेबफा तूने कदर जनी नहीं
वो मानुष किस काम का जिसमें मधुर वाणी नहीं
हंस तो उड़ जाएगा माटी पड़ी रह जाएगी
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